Saturday, June 5, 2010

कुछ पल जिंदिगी का हिस्सा बन जाता है

कुछ पल जिंदिगी का हिस्सा बन जाता है
जिसे शब्दों में बया नहीं कर सकता
सिर्फ एहसास बन कर रूह में बस्ता है
वह पल जिंदिगी का हिस्सा बन जाता है
तुम किया हो मेरे जिंदिगी का मुझे नहीं पता
बस तुम मेरा हिस्सा हो शारीर का
मेरे हर अंग में तुम रहते हो
मेरा गरूर मेरा सब कुछ तुम हो
जिंदिगी तो कट रही है
पर सोचता हु तुम्हारे बिना
ये जिंदगी को कैसे काटुगा???????


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