Thursday, August 7, 2014

हर लम्हा तेरे लिए जिए


हर लम्हा तेरे लिए जिए
पर तेरा दीदार होता नहीं
दिन तो ये भी गुज़र जाएगा पर ये लम्हा गुज़रता नहीं
आग ही आग है फिर क्यूँ सूरज पिघलता नहीं
दाग धोने से जाते नहीं दर्द रोने से घटता नहीं
की जी लु कुछ लम्हा तेरे साथ 
क्यों वह वक्त आता नहीं...

Monday, June 16, 2014

मेरी साँसों को जो महका रही हैं


मेरी साँसों को जो महका रही हैं
ये पहले प्यार की खुशबू
तेरी सासों से शायद आ रही हैं
शुरू ये सिलसिला तो उसी दिन से हुआ था
अचानक तूने जिस दिन मुझे यूँ ही छुआ था
लहर जागी जो उस पल तनबदन में
वो मन को आज भी बहका रही हैं
बहोत तरसा हैं ये दिल तेरे सपने सज़ा के
ये दिल की बात सुन ले, मेरी बाहों में आके
जगाकर अनोखी प्यास मन में
ये मीठी आग जो दहका रही हैं
ये आँखे बोलती हैं, जो हम ना बोल पाये
दबी वो प्यास मन की, नज़र में झिलमिलाये
होठों पे तेरे हल्की सी हसी हैं

मेरी धड़कन बहकती जा रही हैं

 

क्या तुझे पता है
ये मेंहदी लगाना
ये घुमना ये फिरना
ये सजना सबरना
ये खुशिया मानना
ये यू मुस्कुराना
ये इठलाना और झुमना
सब बेकार है जब मै ना देखू
तुझे देख तेरा तारीफ़ ना करू सब बेकार है.....
हा सब बेकार है
इसे मेरी मुहब्बत समझो या मेरी दिवानगी

हा सच सब बेकार है......

बेताब तमन्नाओ की कसक
तुमसे मिलने की कसक
अभी सब रहने दो
आप चाहे रहो नजरो से दुर मगर एक झलक आँखो मे रहने दो

सादर नमन....

Sunday, June 1, 2014

हा मै तुमको देखना चाहता हु


हा मै तुमको देखना चाहता हु
तुम्हारी चेहरे को अपनी आँखों में बसना चाहता हु
हा तुझे बहुत करीब से देखना चाहता हु
तुम्हारे चेहरे को अपने आँखों में समां लेना चाहता हु
हा तुझे मै छू कर महसुस करना चाहता हु
तुमको प्यार ही प्यार करना चाहता हु
हा तुम्हे अपने गले से लगाना चाहता हु
मेरे प्यार का वह आवाज़ तेरे धड़कन को सुनाना चाहता हु
हा मैं तुझे बहुत प्यार करना हु
बहुत प्यार करना हु.,,,



Friday, May 9, 2014

एक ख्वाब


कल रात ना जाने क्यों एक डरावना ख्वाब आया 
किसी का चेहरा चाँद में नजर आया…
डरा सहमा किसी अनजान पगडंडी पे 
अकेला चला जा रहा था 
ना किसी का साथ,ना किसी का हाथ 
पीछे छुटी वह यादे 
मुझे चीख चीख के पुकारती….
पर मै एक कठोर बन 
डरा सहमा अनजान पगडंडी पे 
अकेला चला जा रहा था……..

Monday, December 16, 2013

अक्सर तेरे स्पर्श के बाद


अक्सर तेरे स्पर्श के बाद
में जाग नही पाता
और सच पूछो
तो सो भी नही पाता

सोया होता हूँ
तो चेतन रहता हूँ
चेतन में सम्मोहित रहता हूँ

साँसों के साथ तेरी खुश्बू
मेरे जिस्म में समा जाती है
जब कभी मैं स्वयं से
स्वयं का परिचय पूछता हूँ
तू चुपके से मेरे सामने आ जाती है...